Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में दिए गए रेखांकित अंश की व्याख्या करने के लिए कहा गया है, जिसमें लेखक ने ईर्ष्या से बचने का एक उपाय बताया है।
Step 2: Detailed Explanation:
प्रस्तुत पंक्ति में लेखक रामधारी सिंह 'दिनकर' जी ईर्ष्या से बचने का एक व्यावहारिक मनोवैज्ञानिक उपाय बताते हैं।
व्याख्या: लेखक का कहना है कि जिस व्यक्ति के स्वभाव में ईर्ष्या या जलन की भावना है, उसे अपने मन पर नियंत्रण करने का अभ्यास करना चाहिए। इसका सबसे पहला कदम यह है कि वह उन व्यर्थ की बातों के बारे में सोचना बंद कर दे जो ईर्ष्या को जन्म देती हैं।
'फालतू बातों' से लेखक का तात्पर्य दूसरों की संपत्ति, सफलता, सुख-सुविधाओं आदि पर ध्यान केंद्रित करने और लगातार अपनी स्थिति से उनकी तुलना करने से है। यह तुलना ही व्यक्ति के मन में अभाव और हीनता का भाव पैदा करती है, जो ईर्ष्या के रूप में प्रकट होती है। जब व्यक्ति अपने मन को इन व्यर्थ के विचारों में उलझने से रोकेगा, तभी वह अपनी ऊर्जा को सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों में लगा पाएगा। यह आदत छोड़ना ही मानसिक अनुशासन की दिशा में पहला कदम है।
Step 3: Conclusion:
अतः, लेखक के अनुसार ईर्ष्या का मूल कारण व्यर्थ का चिंतन और दूसरों से तुलना है, इसलिए इस मानसिक आदत को त्याग देना ही ईर्ष्या से मुक्ति का प्रथम सोपान है।