हड़प्पा सभ्यता की धार्मिक एवं सामाजिक स्थिति की विवेचना कीजिए।
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उत्तर लिखते समय, हमेशा यह उल्लेख करें कि हड़प्पा सभ्यता के बारे में हमारी समझ पुरातात्विक स्रोतों जैसे मुहरों, मूर्तियों, बर्तनों और इमारतों पर आधारित है, क्योंकि उनकी लिपि अभी तक रहस्य बनी हुई है।
चूँकि हड़प्पा लिपि को पढ़ा नहीं जा सका है, उनकी सामाजिक और धार्मिक स्थिति का ज्ञान पूरी तरह से पुरातात्विक साक्ष्यों पर आधारित है। सामाजिक स्थिति (Social Condition):
समाज की संरचना: समाज संभवतः विभिन्न वर्गों में विभाजित था, जिसमें शासक वर्ग (जो दुर्ग में रहते थे), धनी व्यापारी, कारीगर और मजदूर शामिल थे।
आहार: हड़प्पा के लोग शाकाहारी और मांसाहारी दोनों थे। वे गेहूं, जौ, चावल, दालें और फलों का सेवन करते थे, और भेड़, बकरी, मछली जैसे जानवरों का मांस भी खाते थे।
वस्त्र एवं आभूषण: वे सूती और ऊनी वस्त्रों का प्रयोग करते थे। स्त्री और पुरुष दोनों ही आभूषणों के शौकीन थे, जिनमें हार, कंगन और अंगूठियाँ शामिल थीं, जो सोने, चांदी, कीमती पत्थरों और मिट्टी से बने होते थे।
मनोरंजन: पासा खेलना उनके मनोरंजन का प्रमुख साधन था। बच्चों के लिए मिट्टी के खिलौने, गाड़ियाँ और सीटियाँ मिली हैं।
अंत्येष्टि संस्कार: हड़प्पा के लोग मृतकों को दफनाते थे। कब्रों में मृतकों के साथ मिट्टी के बर्तन, आभूषण और अन्य वस्तुएं भी रखी जाती थीं, जो उनके पारलौकिक जीवन में विश्वास को दर्शाता है।
धार्मिक स्थिति (Religious Condition):
मातृदेवी की पूजा: बड़ी संख्या में मिली नारी-मूर्तियों से अनुमान लगाया जाता है कि मातृदेवी या उर्वरता की देवी की पूजा प्रमुख थी।
पशुपति शिव की पूजा: मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुहर पर एक त्रिमुखी, योगी की मुद्रा में बैठे पुरुष देवता का चित्रण है, जो जानवरों से घिरे हैं। इसे 'पशुपति' या 'आद्य-शिव' माना गया है।
प्रकृति पूजा: वे प्रकृति के विभिन्न रूपों की भी पूजा करते थे, जैसे वृक्ष (विशेषकर पीपल), जल और जानवर (विशेषकर एकश्रृंगी और कूबड़ वाला बैल)।
अग्नि पूजा: कालीबंगा और लोथल जैसे स्थलों से अग्नि वेदिकाएं मिली हैं, जो अग्नि पूजा या यज्ञ के प्रचलन का संकेत देती हैं।
मंदिरों का अभाव: हड़प्पा स्थलों पर मंदिरों जैसे कोई निश्चित पूजा स्थल नहीं मिले हैं। पूजा संभवतः व्यक्तिगत या सामुदायिक स्तर पर खुले में की जाती थी।