हालदार साहब जब कैप्टन को फेरी लगाते हुए देखते हैं तो उनके मुँह से अनायास निकल जाता है, तो बेचारे की अपनी दुकान भी नहीं है। वे चश्मेवाले की देशभक्ति के कारण उससे सहानुभूति रखते हैं। कैप्टन वास्तव में एक देशभक्त था, जो नेताजी की मूर्ति को बिना चश्मे के देख नहीं सकता था। पानवाले ने जब कैप्टन का मज़ाक उड़ाया, तो हालदार साहब को अच्छा नहीं लगा। हालदार साहब के लिए कैप्टन सहानुभूति का पात्र था|