Comprehension

ईर्ष्या का सम्बन्ध प्रतिद्वन्द्विता से होता है, क्योंकि भिखमंगा करोड़पति से ईर्ष्या नहीं करता। यह एक ऐसी बात है, जो ईर्ष्या के पक्ष में भी पड़ सकती है, क्योंकि प्रतिद्वन्द्विता से भी मनुष्य का विकास होता है। किन्तु, अगर आप संसार व्यापी सुयश चाहते हैं तो आप रसेल के मतानुसार, शायद नेपोलियन से स्पर्द्धा करेंगे। मगर, याद रखिए कि नेपोलियन भी सीजर से स्पर्द्धा करता था और सीजर सिकन्दर से तथा सिकन्दर हरकूलस से, जिस हरकूलस के बारे में इतिहासकारों का यह मत है कि वह कभी पैदा ही नहीं हुआ।

Question: 1

उपर्युक्त अवतरण के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।

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जहाँ कहीं भी "ईर्ष्या", "प्रतिद्वन्द्विता" या ऐतिहासिक पात्रों जैसे "नेपोलियन" और "सीजर" की बात हो, वह दिनकर जी का यह पाठ होगा।
Updated On: Feb 19, 2026
  • पाठ: मित्रता, लेखक: आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
  • पाठ: ईर्ष्या, तू न गयी मेरे मन से, लेखक: रामधारी सिंह 'दिनकर'
  • पाठ: ममता, लेखक: जयशंकर प्रसाद
  • पाठ: क्या लिखूँ?, लेखक: पदुमलाल पुन्नालाल 'बख्शी'
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The Correct Option is B

Solution and Explanation

Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न दी गई पंक्तियों के आधार पर पाठ और उसके रचयिता की पहचान करने से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
प्रस्तुत गद्यांश राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा लिखित प्रसिद्ध वैचारिक निबंध 'ईर्ष्या, तू न गयी मेरे मन से' से लिया गया है।
इस निबंध में लेखक ने ईर्ष्या की प्रकृति और उसके प्रभावों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया है।
Step 3: Final Answer:
सही विकल्प (B) है।
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Question: 2

रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। (रेखांकित अंश: ईर्ष्या का सम्बन्ध प्रतिद्वन्द्विता से होता है... प्रतिद्वन्द्विता से भी मनुष्य का विकास होता है।)

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व्याख्या में "भिखमंगा" और "करोड़पति" के उदाहरण का प्रयोग करके स्पष्टता लाएं।
Updated On: Feb 19, 2026
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Solution and Explanation

Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न ईर्ष्या और प्रतिद्वन्द्विता (Competition) के बीच के संबंध को स्पष्ट करने पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
लेखक का मानना है कि ईर्ष्या हमेशा अपने बराबर वालों या अपने क्षेत्र के लोगों से होती है।
उदाहरण के लिए, एक गरीब भिखारी कभी अमीर व्यक्ति से ईर्ष्या नहीं करता क्योंकि उनके बीच कोई प्रतिद्वन्द्विता नहीं है।
लेखक ईर्ष्या के सकारात्मक पहलू पर ध्यान देते हुए कहते हैं कि जब यह प्रतिद्वन्द्विता का रूप लेती है, तो मनुष्य आगे बढ़ने की कोशिश करता है।
स्वस्थ प्रतियोगिता मनुष्य को नई ऊँचाइयाँ छूने के लिए प्रेरित करती है, जिससे उसका विकास होता है।
Step 3: Final Answer:
ईर्ष्या जब स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बन जाती है, तो वह उन्नति का आधार बनती है।
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Question: 3

लेखक के अनुसार प्रतिद्वन्द्विता का सकारात्मक पक्ष क्या है?

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प्रतिद्वन्द्विता का सकारात्मक अर्थ 'स्वस्थ प्रतियोगिता' (Healthy Competition) से है।
Updated On: Feb 19, 2026
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Solution and Explanation

Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न गद्यांश के माध्यम से यह समझने पर आधारित है कि ईर्ष्या कब उपयोगी हो सकती है।
Step 2: Detailed Explanation:
लेखक के अनुसार प्रतिद्वन्द्विता हमेशा बुरी नहीं होती।
यदि यह ईर्ष्या द्वेष में न बदलकर स्वयं को सुधारने की होड़ में बदल जाए, तो यह विकास का मार्ग प्रशस्त करती है।
किसी श्रेष्ठ व्यक्ति से स्पर्द्धा करना मनुष्य को अपने कार्य में निपुण बनाने और अधिक परिश्रम करने के लिए प्रेरित करता है।
यही प्रतिद्वन्द्विता का सकारात्मक पक्ष है।
Step 3: Final Answer:
प्रतिद्वन्द्विता के कारण ही मनुष्य स्वयं को बेहतर बनाता है और प्रगति करता है।
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