रेखांकित अंश की व्याख्या:
कवि श्याम नारायण पाण्डेय हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के शौर्य का वर्णन करते हुए कहते हैं कि जब महाराणा प्रताप अपने प्रिय घोड़े चेतक पर सवार होकर हाथ में तलवार लेकर युद्ध-भूमि में उतरते थे, तो वे इतने वेग से शत्रुओं पर प्रहार करते थे कि पृथ्वी का मान-मर्दन कर देते थे (अर्थात् भूतल को पानी-पानी कर देते थे)।
वे अपने शत्रुओं के सिरों को काट-काटकर अपनी जवानी की सार्थकता सिद्ध करते थे। उनका मानना था कि एक क्षत्रिय की जवानी तभी सफल है जब वह मातृभूमि की रक्षा के लिए शत्रुओं का संहार करे। इन पंक्तियों में कवि ने महाराणा प्रताप की वीरता और उनके अप्रतिम पराक्रम का अतिशयोक्तिपूर्ण एवं ओजस्वी वर्णन किया है।