भारतीय दर्शन में 'पुरुषार्थ' का क्या अर्थ है?
Step 1: समन्वित दृष्टि.
मानव आकांक्षाएँ केवल भोग या केवल त्याग नहीं; भारतीय सिद्धान्त संतुलित चार लक्ष्यों का प्रस्ताव करता है।
Step 2: पदानुक्रम.
धर्म आधार है—अर्थ/काम की वैधता धर्म से; मोक्ष परम-लक्ष्य।
Step 3: जीवन-प्रयोग.
विद्यार्थी–गृहस्थ–वानप्रस्थ–संन्यास के चरणों में पुरुषार्थ-प्राथमिकताएँ बदलती, पर धर्म/मोक्ष का अभिमुख बना रहता है।
Step 4: निष्कर्ष.
पुरुषार्थ-सिद्धान्त व्यक्ति और समाज दोनों की समग्र उन्नति का संतुलित, दीर्घजीवी ढाँचा है।
योग दर्शन में 'चित्तवृत्ति निरोध' को क्या कहते हैं?
भारतीय दर्शन की उत्पत्ति किससे मानी जाती है?
अद्वैत वेदान्त के अनुसार 'जगत' की सत्ता क्या है?
चार्वाक, बौद्ध और जैन किस दार्शनिक सम्प्रदाय में आते हैं?
स्याद्वाद को समझाने के लिए जैन दर्शन में कितने 'नयों/भंगियों' का प्रतिपादन किया गया?
ईश्वर की सत्ता के लिए 'नैतिक युक्ति' (Moral Argument) का समर्थन किसने किया है?
निम्न में से कौन पुरुषार्थ नहीं है?
'ऋण' की अवधारणा सम्बन्धित है—
निम्नलिखित में से कौन पुरुषार्थ के अन्तर्गत नहीं आता है ?
'एन इंट्रोडक्शन टू एथिक्स' के लेखक कौन हैं ?