हर निर्णय में सीमित संसाधनों को एक उपयोग से दूसरे में लगाना पड़ता है। यदि 1 एकड़ भूमि पर गेहूँ बोया तो मक्का का जो सर्वश्रेष्ठ सम्भव उत्पादन छोड़ दिया गया, वही अवसर लागत है। यही तर्क समय, पूँजी और श्रम पर भी लागू होता है। PPC पर X वस्तु की अतिरिक्त इकाई पाने के लिए Y की जितनी मात्रा छोड़नी पड़े, उतनी \( \Delta Y/\Delta X \) सीमान्त अवसर लागत है; संसाधनों की असमान दक्षता के कारण यह सामान्यतः बढ़ती है जिससे वक्र उद्गम की ओर उत्तल बनता है। नीति में भी अवसर लागत महत्व रखती है: सार्वजनिक परियोजना पर खर्च का अवसर लागत वह निजी निवेश है जो रुक गया। यह अवधारणा हमें नकद खर्च से आगे बढ़कर वास्तविक त्याग देखने की दृष्टि देती है।