मनुष्य अनेक कार्य करता है; पर आर्थिक क्रियाओं की पहचान दो विशेषताओं से होती है—पहली, वे आय या अन्य मौद्रिक प्रतिफल से जुड़ी होती हैं; दूसरी, उनका लक्ष्य दुर्लभ संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग कर इच्छाओं की पूर्ति करना होता है। उत्पादन क्रिया में भूमि, श्रम, पूँजी और उद्यमिता से वस्तुएँ‑सेवाएँ बनती हैं। उपभोग में उपभोक्ता इनका उपयोग करता है। विनिमय क्रिया कीमत तंत्र के माध्यम से वस्तुओं को खरीदारों तक पहुँचाती है। वितरण क्रिया प्रतिफलों—किराया, मजदूरी, ब्याज, लाभ—का बँटवारा करती है, और निवेश भविष्य के उत्पादन के लिए पूँजी निर्माण करता है। सरकारी गतिविधियाँ जैसे कर व सार्वजनिक व्यय भी आर्थिक क्रियाएँ हैं क्योंकि वे आय और संसाधन उपयोग को प्रभावित करती हैं।