अनुभववाद की प्रमुख विशेषताओं की व्याख्या करें।
Step 1: सिद्धान्त-केन्द्र.
ज्ञान का आरम्भ संवेदना से—इन्द्रियों द्वारा मिले 'आईडिया' मन में संकलित होकर जटिल संकल्पनाएँ बनाते हैं; सत्य की कसौटी अनुभव-संगति है।
Step 2: प्रतिनिधि तत्त्व.
लॉक—प्राथमिक/द्वितीयक गुण; बर्कले—"अस्तित्व = अनुभूति"; ह्यूम—कारणता भी नियमित सह-घटना से निकला मनोवैज्ञानिक विश्वास।
Step 3: पद्धति.
परिकल्पना $\rightarrow$ परीक्षण $\rightarrow$ खण्डन/समर्थन; निरीक्षणीय साक्ष्यों को प्राथमिकता। ओक्कम का उस्तरा—अनावश्यक सत्ता न बढ़ाएँ।
Step 4: सीमाएँ व समन्वय.
शुद्ध अनुभव सिद्धान्त-विहीन नहीं; अवधारणात्मक ढाँचे की जरूरत पड़ती है। अतः आधुनिक दृष्टि तर्क (a priori) + अनुभव (a posteriori) के संयोग को स्वीकारती है।
योग दर्शन में 'चित्तवृत्ति निरोध' को क्या कहते हैं?
भारतीय दर्शन की उत्पत्ति किससे मानी जाती है?
अद्वैत वेदान्त के अनुसार 'जगत' की सत्ता क्या है?
चार्वाक, बौद्ध और जैन किस दार्शनिक सम्प्रदाय में आते हैं?
स्याद्वाद को समझाने के लिए जैन दर्शन में कितने 'नयों/भंगियों' का प्रतिपादन किया गया?
ज्ञान प्राप्त करने वाले को क्या कहते हैं?
अनुभववाद के समर्थक हैं
भारतीय दर्शन में 'यथार्थ ज्ञान' कहलाता है—
लाइबनिज के अनुसार ज्ञान का स्रोत क्या है ?
कान्ट के अनुसार ज्ञान का स्रोत क्या है ?