अकबर की महानता इस तथ्य में निहित है कि उसने एक ऐसे साम्राज्य का निर्माण किया जो केवल सैन्य शक्ति पर नहीं, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों के लोगों के सहयोग और सम्मान पर आधारित था।
अकबर की उपलब्धियों को विभिन्न क्षेत्रों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
साम्राज्य का विस्तार और एकीकरण: अकबर एक महान विजेता था। उसने पानीपत की दूसरी लड़ाई (1556) में हेमू को हराकर मुगल सत्ता को फिर से स्थापित किया। उसने मालवा, गुजरात, बंगाल, काबुल, कश्मीर और दक्कन के कुछ हिस्सों को जीतकर एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की।
प्रशासनिक सुधार:
मनसबदारी प्रणाली: उसने सेना और नागरिक प्रशासन को एकीकृत करने के लिए मनसबदारी प्रणाली शुरू की, जो साम्राज्य की रीढ़ बनी।
केंद्रीकृत प्रशासन: उसने एक मजबूत केंद्रीय सरकार की स्थापना की जिसमें विभिन्न विभागों के लिए मंत्री (जैसे दीवान, मीर बख्शी) होते थे।
राजस्व सुधार: उसने राजा टोडरमल की सहायता से 'दहसाला प्रणाली' लागू की, जो एक कुशल और न्यायसंगत भू-राजस्व व्यवस्था थी।
धार्मिक सहिष्णुता और सुलह-ए-कुल की नीति:
उसने 1563 में तीर्थयात्रा कर और 1564 में जजिया कर समाप्त कर दिया।
उसने फतेहपुर सीकरी में 'इबादत खाना' (प्रार्थना गृह) की स्थापना की, जहाँ वह सभी धर्मों के विद्वानों के साथ चर्चा करता था।
उसने 'सुलह-ए-कुल' (सार्वभौमिक शांति) के सिद्धांत का प्रचार किया और 1582 में 'दीन-ए-इलाही' नामक एक समधर्मी नैतिक संहिता की शुरुआत की।
कला और वास्तुकला को संरक्षण: उसने फतेहपुर सीकरी जैसी पूरी राजधानी का निर्माण करवाया, जिसमें बुलंद दरवाजा और पंच महल जैसी इमारतें शामिल हैं। उसने आगरा और लाहौर में किलों का निर्माण करवाया। वह साहित्य और चित्रकला का भी महान संरक्षक था।