Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में दी गई रेखांकित पंक्ति की व्याख्या करने के लिए कहा गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
प्रस्तुत पंक्ति में कवि सूरदास जी निराकार ब्रह्म की भक्ति से मिलने वाले आनंद की अनिर्वचनीयता (जिसे शब्दों में व्यक्त न किया जा सके) को एक दृष्टांत के माध्यम से समझा रहे हैं।
व्याख्या: सूरदास जी कहते हैं कि निराकार ब्रह्म की स्थिति का वर्णन करना अत्यंत कठिन है। उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। जिस प्रकार कोई गूँगा व्यक्ति मीठे फल के रस का स्वाद तो लेता है और उसे वह स्वाद अपने हृदय में (अंतरगत ही) बहुत अच्छा भी लगता है, परन्तु अपनी वाणी न होने के कारण वह उस आनंद को दूसरों के सामने व्यक्त नहीं कर सकता। वह केवल उस आनंद को स्वयं ही अनुभव कर सकता है। ठीक उसी प्रकार, जो भक्त निराकार ब्रह्म को प्राप्त कर लेता है, वह उसके आनंद को अनुभव तो करता है परन्तु उसे वाणी से बता नहीं सकता।
Step 3: Conclusion:
अतः, इस पंक्ति के माध्यम से कवि यह कहना चाहते हैं कि निराकार ब्रह्म की अनुभूति एक व्यक्तिगत और आंतरिक अनुभव है, जिसे शब्दों में पिरोना असंभव है।