Step 1: Understanding the Question:
यह प्रश्न तृतीयक-ब्यूटिल ब्रोमाइड की नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया की क्रियाविधि (\(S_N1\)) से संबंधित है।
हमें दिए गए कथनों में से गलत कथन की पहचान करनी है।
Step 2: Detailed Explanation:
• यह अभिक्रिया एक तृतीयक हैलाइड की उपस्थिति के कारण एकाणुक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन (\(S_N1\)) क्रियाविधि का अनुसरण करती है।
• \(S_N1\) अभिक्रिया का वेग केवल हैलाइड की सांद्रता पर निर्भर करता है:
\[ \text{वेग} = k [t\text{-butyl bromide}] \]
अतः वेग सबस्ट्रेट की सांद्रता के समानुपाती होता है (कथन D सही है)।
• नाभिकस्नेही (\(OH^-\)) वेग-निर्धारक चरण में भाग नहीं लेता, इसलिए इसकी सांद्रता बढ़ाने से वेग में कोई बदलाव नहीं होता (कथन B सही है)।
• इस अभिक्रिया का सबसे धीमा चरण तृतीयक-ब्यूटिल ब्रोमाइड का वियोजन होकर कार्बधनायन बनाना है, जो कि वेग निर्धारक चरण है (कथन C सही है)।
• ध्रुवीय प्रोटिक विलायक (जैसे जल) कार्बधनायन और संक्रमण अवस्था को स्थिर करके \(S_N1\) अभिक्रिया की दर को बढ़ाते हैं। एथिल ऐल्कोहॉल में जल मिलाने से विलायक की ध्रुवीयता बढ़ेगी, जिससे अभिक्रिया का वेग बढ़ना चाहिए, न कि कम होना। अतः कथन (A) गलत है।
इसलिए गलत कथन विकल्प (A) है।
Step 3: Final Answer:
अतः, सही विकल्प (A) है क्योंकि जल मिलाने पर ध्रुवीयता बढ़ने के कारण अभिक्रिया का वेग बढ़ता है।